Friday, March 2, 2018

मिर्गी Epilepsy

 जिस रोग में रोगी अपने होशों-हवास खो देता है उसे अपस्मार या मिर्गी कहते हैं। इस रोग में रोगी को बेहोशी आ जाती है, हाथ-पैर कांपने लगते हैं, मुंह से झाग निकलने लगता है, शरीर में कड़ापन आ जाता है, और दिमाग में असंतुलनता आ जाती है। मिर्गी के दौरे पड़ने पर रोगी अपनी स्मरण शक्ति थोड़ी देर के लिए खो देता है और उसे किसी भी बात का ज्ञान नहीं रहता है।

हिस्टीरिया

यह रोग स्त्रियों में पाया जाता है।

RelianceTrends CPV (IN)

  दिमागी परेशानी के कारण यदि नींद न आती हो तो मानसिक पागल होता है, संभोग पूरी तरह से न कर पाने के कारण कामोन्माद और प्यार में असफल होने के कारण प्रेमोन्माद होता है। इस रोग में रोगी की मानसिक स्थिति खराब हो जाती है जिससे वह अश्लील कार्य और अश्लील बातें करता रहता है। जब कभी भीतरी गर्मी प्रभाव अधिक होकर दिमाग पर पहुंचती है तो पागलपन का हल्का दौरा पड़ने लगता है। उस व्यक्ति को होश नहीं रहता है कि वह क्या कर रहा है। उसके मुंह से उल्टी-सीधी बातें निकलती रहती हैं। चेतना क्षीण होने लगती है और रोगी मानसिक पागलपन का शिकार होने लगता है।

 मानसिक रोग में रोगी की बुद्धि नष्ट होने के कारण वह भ्रमित रहता है, आंखे इधर-उधर घूमती है, सोचने की शक्ति खत्म हो जाती है, साहस नष्ट हो जाता है, वह हर समय डरा-डरा से रहता है, कुछ न कुछ बड़बड़ाता रहता है, बिना किसी कारण के हंसने व रोने लगता है। इसके अलावा अधिक बोलना, हाथ-पांवों को इधर-उधर फेकना, नाचना, गाना, निर्लज्जता, बिना वस्त्र पहने घूमना, क्रोध करना, निरन्तर पानी पीने की इच्छा, शरीर में पीलापन, मुंह से लार बहना, उल्टी होना, गन्दगी की पहचान न होना, मांस और शक्ति का खत्म होना आदि मानसिक रोग के लक्षण हैं।

     आयुर्वेदिक उपचार:--

आयुर्वेद में वर्णित विभिन्न मेध्य द्रव्यों से मिर्गी रोग को समूल नष्ट किया जा सकता है,मेरे 20 वर्षो के चिकित्सीय अभ्यास में मैने पाया कि निम्न ओषधियों का प्रयोग करने से मिर्गी रोगियो को बहुत ज्यादा फायदा हुआ है।
अब जनता की सेवार्थ इसे सार्वजनिक कर रहा हूँ, मिर्गी रोगी अवश्य लाभ उठाये।

पीपल, सोंठ, पीपलामूल, चव्य, चित्रक, कालि मिर्च, हरड़, बहेड़ा, आँवला, बायविडंग, करन्ज, जीरा, धनिया, अजवायन, सेन्धा नमक ओर काला नमक इन सभी को समान मात्रा मे ले कर सबका कपड्छन चूर्ण बना ले. 3 से 6 ग्राम तक की मात्रा गर्म पानी के साथ सेवन करे.

अपामार्ग के पत्तों का रस 100ग्राम, 100ग्राम गाय का शुद्ध घी में डाल कर धीमी आच पर पकाए, जब पत्तों का रस जल जाए तब पतले कपड़े से छान कर किसी शीशी मे भर कर रखे. इस घृत को सुबह शाम 2-2 बून्द नाक मे डालने से मिर्गी का रोग ठीक हो जाता है.

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो, प्लीज हमें सपोर्ट करें ऊपर दिए गए फॉलो के बटन पर क्लिक करके, ताकि हमारी आने वाली नई पोस्ट का नोटिफिकेशन आपको मिल जाए! इस पोस्ट से जुड़ी कोई भी समस्या हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ना भूले!

0 comments:

Post a Comment

Shopclues (CPA) IN
RelianceTrends CPV (IN)

Followers