Monday, March 26, 2018

इन कामो के बाद तुरंत पानी नही पिए


पानी शरीर का सार है, हमारे शरीर का 75 % पानी ही है, हमको दिन भर में कम से कम 8-१० गिलास पानी अवश्य पीना चाहिए, मगर कुछ घड़ियाँ ऐसी होती हैं जिनमे पानी पीना अनेक रोगों को आकर्षित करता है, ऐसे में इसका पूरा ख्याल रखें. आइये जाने…

बिलकुल सोते हुए
शौच के आते ही
लघुशंका (मूत्र) करते ही
दूध के पीते ही
चाय पीते ही
चाट खाते ही
चना खाते ही
भोजन करते ही
चलकर थके हुए हों तो
पसीने में आते ही
मेहनत करके निबटते हुए
भूखे पेट व्रत खोलते ही
उपरोक्त परिस्थितियों में अचानक से पानी नहीं पीना चाहिए। जैसे ही शरीर का तापमान सामान्य हो तब ही जल ग्रहण करें। अन्यथा शारीर और पानी का तापमान भिन्न होने के कारण शारीर रोगों कि चपेट में आ सकता है।
भोजन के तत्काल बाद गले में खुश्की जैसा लगता है, उससे विचलित होने के बजाये उसे सहन करने कि आदत डालनी चाहिए, जो लोग भोजन के तत्काल बाद पानी पीते हैं, वे लगभग एक घंटे तक सब्र रखें।

Health Benefit of Drinking Water Early in morning.

वैसे तो सुबह उठ कर ताम्बे के बर्तन में रखे हुए पानी के अनगिनत लाभ है, छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी बीमारी के लिए ये रामबाण सिद्ध हो सकता हैं। आज हम आपको ऐसी ही कुछ लाभ बताते हैं। कई सारी बीमारियां हमारे पेट से ही जन्‍म लेती हैं इसलिए पेट को दुरुस्‍त रखना बहुत जरूरी है, तो क्‍यों न इसकी शुरूआत सुबह होने के बाद करें और उठने के तुरंत बाद खाली पेट पानी पियें और स्‍वस्‍थ रहें।

तो आइये जाने जागने के तुरंत बाद क्यों पियें पानी

1:- सुबह खाली पेट पानी पीना है फायदेमंद

क्‍या आपको मालूम है कि अगर आप सुबह के समय उठते ही रोजाना खाली पेट पानी पियेंगे तो आपकी कितनी बीमारियां दूर हो सकती हैं? कई सारी बीमारियां हमारे पेट से ही जन्‍म लेती हैं और अगर आप खाली पेट पानी पियेगें तो आप इस खतरे को काबू में करने का पहला कदम उठाएंगे। आइये जानते हैं कि सुबह खाली पेट पानी पीने से हमारे शरीर को कौन-कौन से लाभ पहुंचते हैं।
2:- पेट साफ रहता है

जब आप बहुत सारा पानी पीते हैं तो आपको अपने आप ही टॉयलेट जाने की इच्‍छा होने लगती है। अगर ऐसा रोजाना करेगें तब आपके पेट का सिस्‍टम गंदगी को बाहर निकालने लगेगा और आपका पेट साफ हो जाएगा। जिन लोगों को कब्ज़ की शिकायत रहती है उनके लिए ये नुस्खा बेहद कारगर साबित होता है।

3:- शरीर से गंदगी बाहर निकाले

सुबह सुबह उठकर खाली पेट पानी पीने से आपके पेट के अंदर की हर प्रकार की गंदगी बाहर निकल जाती है। पानी शरीर से हर प्रकार की गंदगी को बाहर निकाल देता है। जब आप खाली पेट अधिक पानी पी कर पेशाब करते हैं, तब आपका शरीर गंदगी से छुटकारा पा लेता है और साथ ही, आपको ताजगी का एहसास होता है।

4:- भूख बढ़ती है

जब सुबह पेट साफ नहीं हो पाता तो भूख भी नहीं लगती। ऐसे में आपके शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। अगर आप सुबह उठते ही पानी पीते हैं तो आपका पेट साफ हो जाता है और इस प्रकार से आपको भूख लगती है। फिर आपका सुबह का नाश्ता अच्‍छा होता है।
5:- सिरदर्द से छुटकारा

अक्सर लोगों को नींद पूरी करने के बावजूद सुबह सिर दर्द महसूस होता है। हममें से काफी लोगों को ये बात नहीं मालूम होती कि कई बार हमारे शरीर के अंदर पानी की कमी ही वजह से सिर में दर्द शुरु हो जाता है। अगर आपको भी ऐसी समस्या का सामना करना पड़ता है तो कोशिश करें कि सुबह खाली पेट बहुत सारा पानी पियें।

6:- बढ़ाए मेटाबॉलिज्‍म

पानी पीने से मेटोबॉलिज्म को भी मजबूती मिलती है। सुबह सुबह खाली पेट पानी पीने से आपके शरीर का मेटाबॉलिज्‍म 24 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि आप खाने को जल्‍द पचा सकेगें। जब खाना ठीक से पच जाता है तो शरीर अन्य समस्याओं से भी बच जाता है।

7:- खून बढ़ता है

सुबह सुबह खाली पेट पानी पीना आपका खून भी बढ़ाता है। दरअसल, खाली पेट पानी पीने से रेड ब्‍लड सेल्‍स जल्‍दी जल्‍दी बढ़ने लगते हैं। इसलिए अगर आपको खून की कमी है तो आप इसकी आदत जरूर डाल लें।

8:- वजन घटता है

अगर आप ओवर वेट हैं, और वजन घटाना चाहते हैं तो सुबह खाली पेट पानी पीना आपकी मद कर सकता है। सुबह खाली पेट पानी पीने से शरीर से खराब ट्रांसफैट बाहार निकल कर शरीर का फैट मैटोबॉलिज्‍म बढ़ाता है। इस वजह से आपको वजन घटाने में आसानी होती है।
9:- त्वचा पर चमक आती है

जब आप सुबह उठते ही सबसे पहले पानी पियेंगे, तो आपकी त्वचा चमकने लगेगी। इस आदत से चेहरे पर निकलने वाले कील-मुंहासे पानी पीने से साफ हो जाएंगे। दरअसल, चेहरे की चमक का पेट के स्वास्थ्य से गहरा संबंध होता है। जब पेट ठीक रहेगा तो आपकी त्वचा स्वस्थ्य रहेगी।

Friday, March 23, 2018

बच्चो के लिये घरेलु उपचार

👉 *बच्चोके दस्तमे,बच्चोकी शरदी झुकाममे उम्रके नजरीयेसे बालचातुर्भद्र चूरण शहदसे दिनमें तीन बार चटाये।*
👉 *बच्चोमें खाँसी* ::थोडी हल्दी थोडा अजवायन और तीन तुलसी पत्ते डालकर उबला हुआ दूध दे।बुखार हो तो ना दे।
👉 *पेटके कीडे*:: मीठा बंध करा दे और रोज खाली पेट चना या बेसनके आटेसे बनी बिना तली कोई भी चीज खिलाये।
👉 *पेट दर्दमें* अजवायन,जीरा,पीपरके मुलका जल पिलाये।


👉 *बच्चैमे कब्ज*: यह आम बात है बच्चै दो चार रोजमे एक बार जाये वह कोई रोग नही है किन्तु ईनके कारण बच्चा रोता हो दर्द हो खाता ना हो तो उसे साबूत हरड हरीतकीको साफ पानी घिसकर वह पिलाये।
👉 *दांत नीकलना*::बालचातुर्भद्र दे।
👉 *बालकोमे बाल झडना* ::-नीमके पतोकी पेस्ट लगाये।
  जो बच्चा माँ पर आधारित हो एसे बच्चोके उपचारसे पहले माँको संयमित जीवन और आहार विहारमे परहेज करना आवश्यक है फिर जरुर लगे तो बच्चोका उपचार करे

 👉 *शैयामूत्र* शाम 8 बजेके बाद जल ना दे और कोन्ग्नियम सिरप आधे से दो चम्मच दे।
👉  *बच्चोमें दस्त लूज मोशन* बालभद्र चूर्ण एक चूटकी शहद से चटाए।

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Friday, March 16, 2018

आप की रसोई में छुपा है स्वास्थय का खजाना

आइये खोजे रसोई में स्वास्थ्य 
1= नमक केवल सेन्धा प्रयोग करें। थायराइड, बी पी, पेट ठीक होगा।

2=कुकर स्टील का ही काम में लें। एल्युमिनियम में मिले lead से होने वाले नुकसानों से बचेंगे

3=तेल कोई भी रिफाइंड न खाकर, केवल तिल्, सरसों, मूंगफली, नारियल प्रयोग करें। रिफाइंड में बहुत केमिकल होते हैं जो शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा करते हैं ।

4=सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर, मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करें।

5= रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है, प्रदूषित हवा बाहर करें।

6= काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं। खाने में अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी।

7= देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं। अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता।

8=ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें, सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा।

9=ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं। आयरन की कमी किसी को नहीं होगी।

10=भोजन का समय निश्चित करें, पेट ठीक रहेगा।
भोजन के बीच बात न करें, भोजन ज्यादा पोषण देगा।

11=नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें। पोषक विटामिन, फाइबर मिलेंगें।

12=सुबह के खाने के साथ देशी गाय के दूध का बना ताजा दही लें, पेट ठीक रहेगा।

13=चीनी कम से कम प्रयोग करें, ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी।

14=चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या देशी शक्कर लें।

15= छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करें, फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते।

16= चाय के समय, आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे


डस्ट बिन एक रसोई में एक बाहर रखें, सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें।
रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों तेल लगाएं, सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें।
करेले, मैथी, मूली याने कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध रहेगा।

A. पानी मटके वाले से ज्यादा ठंडा न पिएं, पाचन व दांत ठीक रहेंगे।

B.प्लास्टिक, एल्युमिनियम रसोई से हटाये, केन्सर कारक हैं।

C.माइक्रोवेव ओवन का प्रयोग केन्सर कारक है।

D.खाने की ठंडी चीजें कम से कम खाएँ, पेट और दांत को खराब करती हैं।

E.बाहर का खाना बहुत हानिकारक है, खाने से सम्बंधित ग्रुप से जुड़कर सब घर पर ही बनाएं।

F. तली चीजें छोड़ें, वजन, पेट, एसिडिटी ठीक रहेंगी।


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मैदा, बेसन, छौले, राजमां, उड़द कम खाएँ, गैस की समस्या से बचेंगे।

अदरक, अजवायन का प्रयोग बढ़ाएं, गैस और शरीर के दर्द कम होंगे।

बिना कलौंजी वाला अचार हानिकारक होता है।


पानी का फिल्टर R O वाला नहीं, हानिकारक है। 
U V वाला ही प्रयोग करें, सस्ता भी और बढ़िया भी।

रसोई में ही बहुत से कॉस्मेटिक्स हैं, इस प्रकार के ग्रुप से जानकारी लें।

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रात को आधा चम्मच त्रिफला एक कप पानी में डाल कर रखें, सुबह कपड़े से छान कर इस जल से आंखें धोएं, चश्मा उतर जाएगा। छान कर जो पाउडर बचे उसे फिर एक गिलास पानी में डाल कर रख दें। रात को पी जाएं। पेट साफ होगा, कोई रोग एक साल में नहीं रहेगा।

.सुबह रसोई में चप्पल न पहनें, शुद्धता भी, एक्यू प्रेशर भी।

रात का भिगोया आधा चम्मच कच्चा जीरा सुबह खाली पेट चबा कर वही पानी पिएं, एसिडिटी खतम।

एक्यू प्रेशर वाले पिरामिड प्लेटफार्म पर खड़े होकर खाना बनाने की आदत बना लें तो भी सब बीमारी शरीर से निकल जायेगी।

 चौथाई चम्मच दालचीनी का कुल उपयोग दिन भर में किसी भी रूप में करने पर निरोगता अवश्य होगी।

* रसोई के मसालों से बना चाय मसाला स्वास्थ्यवर्धक है।

* सर्दियों में नाखून बराबर जावित्री कभी चूसने से सर्दी के असर से बचाव होगा।

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* सर्दी में बाहर जाते समय, 2 चुटकी अजवायन मुहं में रखकर निकलिए, सर्दी से नुकसान नहीं होगा

* रस निकले नीबू के चौथाई टुकड़े में जरा सी हल्दी, नमक, फिटकरी रखकर दांत मलने से दांतों का कोई भी रोग नहीं रहेगा


 * कभी कभी नमक में, हल्दी में 2 बून्द सरसों का तेल डाल कर दांतों को उंगली से साफ करें, दांतों का कोई रोग टिक नहीं सकता।

* बुखार में 1 लीटर पानी उबाल कर 250 ml कर लें, साधारण ताप पर आ जाने पर रोगी को थोड़ा थोड़ा दें, दवा का काम करेगा।

* सुबह के खाने के साथ घर का जमाया देशी गाय के ताजा दही जरूर शामिल करें, प्रोबायोटिक का काम करेगा




 *हृदय की बीमारी*

*आयुर्वेदिक इलाज !!*

हमारे देश भारत मे 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे

उनका नाम था *महाऋषि वागवट जी !!* 

उन्होने एक पुस्तक लिखी थी

 जिसका नाम है *अष्टांग हृदयम!!* 

*(Astang  hrudayam)*

और इस पुस्तक मे उन्होने ने
 बीमारियो को ठीक करने के लिए *7000* सूत्र लिखे थे ! 

यह उनमे से ही एक सूत्र है !! 

वागवट जी लिखते है कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है ! 

मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है ! 

तो इसका मतलब है कि रकत (blood) मे acidity(अम्लता ) बढ़ी हुई है ! 

अम्लता आप समझते है !

जिसको अँग्रेजी मे कहते है acidity !! 

*अम्लता दो तरह की होती है !*

एक होती है *पेट कि अम्लता !*

*और एक होती है रक्त (blood) की अम्लता !!*

आपके पेट मे अम्लता जब बढ़ती है !

तो आप कहेंगे पेट मे जलन सी हो रही है !! 

खट्टी खट्टी डकार आ रही है ! 

मुंह से पानी निकाल रहा है ! 

और अगर ये अम्लता (acidity)और बढ़ जाये ! 

तो hyperacidity होगी ! 

और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त मे आती है तो रक्त अम्लता  (blood acidity) होती !! 

और जब blood मे acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त  (blood) दिल की नलियो मे से निकल नहीं पाता ! 

और नलिया मे blockage कर देता है ! 

तभी heart attack होता है !! इसके बिना heart attack नहीं होता !! 

और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं ! 

क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है !! 

इलाज क्या है ?? 

वागबट जी लिखते है कि जब रक्त (blood) मे अम्लता (acidity) बढ़ गई है ! 

तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय है ! 

आप जानते है दो तरह की चीजे होती है ! 

*अम्लीय और क्षारीय !!*

*acidic and alkaline* 

अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ! ????? 

*acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है )?????*

*neutral*

होता है सब जानते है !!

तो वागबट जी लिखते है ! 

*कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय(alkaline) चीजे खाओ !*

तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी !!! 

और रक्त मे अम्लता neutral हो गई ! 

तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं !! 

ये है सारी कहानी !! 

अब आप पूछोगे जी ऐसे कौन सी चीजे है जो क्षारीय है और हम खाये ?????

आपके रसोई घर मे ऐसी बहुत सी चीजे है जो क्षारीय है ! 

जिनहे आप खाये तो कभी heart attack न आए ! 

और अगर आ गया है ! 

तो दुबारा न आए !!

सबसे ज्यादा आपके घर मे क्षारीय चीज है वह है लौकी !!

जिसे दुधी भी कहते है !!

 English मे इसे कहते है bottle gourd !!! 

जिसे आप सब्जी के रूप मे खाते है ! 

इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है ! 

तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो !! 

या कच्ची लौकी खायो !! 
वागवतट जी कहते है रक्त  की अम्लता कम करने की सबसे  ज्यादा ताकत लौकी मे ही है ! 

तो आप लौकी के रस का सेवन करे !! 

कितना सेवन करे ????????? 

रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो !! 

कब पिये ?? 

सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते है !! 

या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते है !!

 इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते है !

इसमे 7 से 10 पत्ते के तुलसी के डाल लो 

*तुलसी बहुत क्षारीय है !!*

इसके साथ आप पुदीने से 7 से 10 पत्ते मिला सकते है ! 

*पुदीना बहुत क्षारीय है !*

इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ! 

ये भी बहुत क्षारीय है !! 

लेकिन याद रखे नमक काला या सेंधा ही डाले ! 

वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले !! 

ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है !!!! 

तो मित्रों आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करे !! 

2 से 3 महीने आपकी सारी heart की blockage ठीक कर देगा !! 

21 वे दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा !!!

कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी !! 

घर मे ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा !! 

और आपका अनमोल शरीर और लाखो रुपए आपरेशन के बच जाएँगे !! 

और पैसे बच जाये ! तो किसी गौशाला मे दान कर दे ! 

डाक्टर को देने से अच्छा है !किसी गौशाला दान दे !! 

हमारी गौ माता बचेगी तो भारत बचेगा !!


हल्दी का पानी 

*पानी में हल्दी मिलाकर पीने से होते है यह 7 फायदें*.....

1. गुनगुना हल्दी वाला पानी पीने से दिमाग तेज होता है. सुबह के समय हल्दी का गुनगुना पानी पीने से दिमाग तेज और उर्जावान बनता है.

2. रोज यदि आप हल्दी का पानी पीते हैं तो इससे खून में होने वाली गंदगी साफ होती है और खून जमता भी नहीं है. यह खून साफ करता है और दिल को बीमारियों से भी बचाता है.

3. लीवर की समस्या से परेशान लोगों के लिए हल्दी का पानी किसी औषधि से कम नही है. हल्दी के पानी में टाॅक्सिस लीवर के सेल्स को फिर से ठीक करता है. हल्दी और पानी के मिले हुए गुण लीवर को संक्रमण से भी बचाते हैं.

4. हार्ट की समस्या से परेशान लोगों को हल्दी वाला पानी पीना चाहिए. हल्दी खून को गाढ़ा होने से बचाती है. जिससे हार्ट अटैक की संभावना कम हो जाती है.

5. जब हल्दी के पानी में शहद और नींबू मिलाया जाता है तब यह शरीर के अंदर जमे हुए विषैले पदार्थों को निकाल देता है जिसे पीने से शरीर पर बढ़ती हुई उम्र का असर नहीं पड़ता है. हल्दी में फ्री रेडिकल्स होते हैं जो सेहत और सौंदर्य को बढ़ाते हैं.

6. शरीर में किसी भी तरह की सजून हो और वह किसी दवाई से ना ठीक हो रही हो तो आप हल्दी वाला पानी का सेवन करें. हल्दी में करक्यूमिन तत्व होता है जो सूजन और जोड़ों में होने वाले असाहय दर्द को ठीक कर देता है. सूजन की अचूक दवा है हल्दी का पानी.

7. कैंसर खत्म करती है हल्दी. हल्दी कैंसर से लड़ती है और उसे बढ़ने से भी रोक देती है. हल्दी एंटी.कैंसर युक्त होती है. यदि आप सप्ताह में तीन दिन हल्दी वाला पानी पीएगें तो आपको भविष्य में कैंसर से हमेशा बचे रहेगें.


हमारे वेदों के अनुसार स्वस्थ रहने के १५ नियम 

१- खाना खाने के १.३० घंटे बाद पानी पीना है 

२- पानी घूँट घूँट करके पीना है जिस से अपनी मुँह की लार पानी के साथ मिलकर पेट में जा सके , पेट में acid बनता है और मुँह में छार ,दोनो पेट में बराबर मिल जाए तो कोई रोग पास नहीं आएगा 

३- पानी कभी भी ठंडा ( फ़्रीज़ का  )नहीं पीना  है। 

४- सुबह उठते ही बिना क़ुल्ला किए २ ग्लास पानी पीना है ,रात भर जो अपने मुँह में लार है वो अमूल्य है उसको पेट में ही जाना ही  चाहिए । 

५- खाना ,जितने आपके मुँह में दाँत है उतनी बार ही चबाना  है । 

६ -खाना ज़मीन में पलोथी मुद्रा या उखड़ूँ बैठकर ही भोजन करे । 

७ -खाने के मेन्यू में एक दूसरे के विरोधी भोजन एक साथ ना करे जैसे दूध के साथ दही , प्याज़ के साथ दूध , दही के साथ उड़द दल 

८ -समुद्री नमक की जगह सेंध्या नमक या काला नमक खाना चाहिए

 ९-रीफ़ाइन तेल , डालडा ज़हर है इसकी जगह अपने इलाक़े के अनुसार सरसों , तिल , मूँगफली , नारियल का तेल उपयोग में लाए । सोयाबीन के कोई भी प्रोडक्ट खाने में ना ले इसके प्रोडक्ट को केवल सुअर पचा सकते है , आदमी में इसके पचाने के एंज़िम नहीं बनते है ।

१०- दोपहर के भोजन के बाद कम से कम ३० मिनट आराम करना चाहिए और शाम के भोजन बाद ५०० क़दम पैदल चलना चाहिए 

११- घर में चीनी (शुगर )का उपयोग नहीं होना चाहिए क्योंकि चीनी को सफ़ेद करने में १७ तरह के ज़हर ( केमिकल )मिलाने पड़ते है इसकी जगह गुड़ का उपयोग करना चाहिए और आजकल गुड बनाने में कॉस्टिक सोडा ( ज़हर ) मिलाकर गुड को सफ़ेद किया जाता है इसलिए सफ़ेद गुड ना खाए । प्राकृतिक गुड ही खाये । और प्राकृतिक गुड चोकलेट कलर का होता है। ।

१२ - सोते समय आपका सिर पूर्व या दक्षिण की तरफ़ होना चाहिए  ।    

१३- घर में कोई भी अलूमिनियम के बर्तन , कुकर नहीं होना चाहिए । हमारे बर्तन मिट्टी , पीतल लोहा , काँसा के होने चाहिए 

१४ -दोपहर का भोजन ११ बजे तक अवम शाम का भोजन सूर्यास्त तक हो जाना चाहिए   

१५ सुबह भोर के समय तक आपको देशी गाय के दूध से बनी छाछ (सेंध्या नमक और ज़ीरा बिना भुना हुआ मिलाकर  ) पीना चाहिए ।     यदि आपने ये नियम अपने जीवन में लागू कर लिए तो आपको डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और देश के ८ लाख करोड़ की बचत होगी । यदि आप बीमार है तो ये नियमों का पालन करने से आपके शरीर के सभी रोग ( BP , शुगर ) अगले ३ माह से लेकर १२ माह में ख़त्म हो जाएँगे  ।



सर्दियों में उठायें मेथीदानों से भरपूर लाभ

मेथीदाना उष्ण, वात व कफनाशक, पित्तवर्धक, पाचनशक्ति व बल वर्धक एवं ह्रदय के लिए हितकर है | यह पुष्टिकारक, शक्ति - स्फूर्तिदायक टॉनिक की तरह कार्य करता है | सुबह – शाम इसे पानी के साथ निगलने से पेट को निरोग बनाता है, कब्ज व गैस को दूर करता है | इसकी मूँग के साथ सब्जी बनाकर भी खा सकते हैं | यह मधुमेह के रोगियों के लिए खूब लाभदायी हैं |*

अपनी आयु के जितने वर्ष व्यतीत हो चुके हैं, उतनी संख्या में मेथीदाने रोज धीरे – धीरे चबाना या चूसने से वृद्धावस्था में पैदा होनेवाली व्याधियों, जैसे – घुटनों व जोड़ों का दर्द, भूख न लगना, हाथों का सुन्न पड़ जाना, सायटिका, मांसपेशियों का खिंचाव, बार – बार मूत्र आना, चक्कर आना आदि में लाभ होता है | गर्भवती व स्तनपान करानेवाली महिलाओं को भुने मेथीदानों का चूर्ण आटे के साथ मिला के लड्डू बना के खाना लाभकारी है |

शक्तिवर्धक पेय

दो चम्मच मेथीदाने एक गिलास पानी में ४ – ५ घंटे भिगोकर रखें फिर इतना उबालें कि पानी चौथाई रह जाय | इसे छानकर २ चम्मच शहद मिला के पियें |

औषधीय प्रयोग

कब्ज : २० ग्राम मेथीदाने को २०० ग्राम ताजे पानी में भिगो दें | ५ – ६ घंटे बाद मसल के पीने से मल साफ़ आने लगता है | भूख अच्छी लगने लगती है और पाचन भी ठीक होने लगता है |*

जोड़ों का दर्द : १०० ग्राम मेथीदाने अधकच्चे भून के दरदरा कूट लें | इसमें २५ ग्राम काला नमक मिलाकर रख लें | २ चम्मच यह मिश्रण सुबह – शाम गुनगुने पानी से फाँकने से जोड़ों, कमर व घुटनों का दर्द, आमवात ( गठिया ) का दर्द आदि में लाभ होता है | इससे पेट में गैस भी नहीं बनेगी |

पेट के रोगों में : १ से ३ ग्राम मेथीदानों का चूर्ण सुबह, दोपहर व शाम को पानी के साथ लेने से अपच, दस्त, भूख न लगना, अफरा, दर्द आदि तकलीफों में बहुत लाभ होता है |

दुर्बलता : १ चम्मच मेथीदानों को घी में भून के सुबह – शाम लेने से रोगजन्य शारीरिक एवं तंत्रिका दुर्बलता दूर होती है |

मासिक धर्म में रुकावट : ४ चम्मच मेथीदाने १ गिलास पानी में उबालें | आधा पानी रह जाने पर छानकर गर्म – गर्म ही लेने से मासिक धर्म खुल के होने लगता है |

अंगों की जकड़न : भुनी मेथी के आटे में गुड़ की चाशनी मिला के लड्डू बना लें | १ – १ लड्डू रोज सुबह खाने से वायु के कारण जकड़े हुए अंग १ सप्ताह में ठीक हो जाते हैं तथा हाथ – पैरों में होनेवाला दर्द भी दूर होता है |

विशेष : सर्दियों में मेथीपाक, मेथी के लड्डू, मेथीदानों व मूँग – दाल की सब्जी आदि के रूप में इसका सेवन खूब लाभदायी हैं |

HEART ATTACK
गर्म पानी पीना

यह भोजन के बाद गर्म पानी पीने के बारे में ही नहीं HEART ATTACK
 के बारे में भी एक अच्छा लेख है। चीनी और जापानी अपने भोजन के बाद गर्म चाय पीते हैं, ठंडा पानी नहीं। अब हमें भी उनकी यह आदत अपना लेनी चाहिए। जो लोग भोजन के बाद ठंडा पानी पीना पसन्द करते हैं यह लेख उनके लिए ही है। 

भोजन के साथ कोई ठंडा पेय या पानी पीना बहुत हानिकारक है क्योंकि ठंडा पानी आपके भोजन के तैलीय पदार्थों को जो आपने अभी अभी खाये हैं ठोस रूप में बदल देता है। इससे पाचन बहुत धीमा हो जाता है। जब यह अम्ल के साथ क्रिया करता है तो यह टूट जाता है और जल्दी ही यह ठोस भोजन से भी अधिक तेज़ी से आँतों द्वारा सोख लिया जाता है। यह आँतों में एकत्र हो जाता है। फिर जल्दी ही यह चरबी में बदल जाता है और कैंसर के पैदा होने का कारण बनता है। 

इसलिए सबसे अच्छा यह है कि भोजन के बाद गर्म सूप या गुनगुना पानी पिया जाये। एक गिलास गुनगुना पानी सोने से ठीक पहले अभी पीना चाहिए। इससे खून के थक्के नहीं बनेंगे और आप हृदयाघात से बचे रहेंगे। 
एक हृदय रोग विशेषज्ञ का कहना है कि यदि इस संदेश को पढ़ने वाला प्रत्येक व्यक्ति इसे १० लोगों को भेज दे, तो वह कम से कम एक जान बचा सकता है। 

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Wednesday, March 14, 2018

क्या आप एसिडिटी से हैं परेशान ? इन चीज़ों से होगा आराम


अगर आप भी एसिडिटी से परेशान हो तो नीचे दिए गए टिप्स पढ़ें. ये सभी चीजें आपको आसानी से घर में मिल जाएंगी|हमारा उद्देश्य आयुर्वेद को हर घर तक पहुंचाना है इसलिए इस संदेश को सभी के साथ शेयर करें|

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A.अदरक का सेवन....................
जब भी आपको एसिडिटी महसूस हो मुंह में थोड़ा अदरक चबाएं या फिर अदरक वाला गर्म पानी लें. क्योंकि इसमें पेट की एसिडिटी में आराम पहुंचाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व मौजूद होते हैं.

B.ठंडे दूध का सेवन....................
कैल्शियम से भरपूर दूध एसिडिटी के दर्द को शांत कर देता है. इसीलिए जब भी आपको पेट में दर्द या जलन महसूस हो तो उसी वक्त एक ग्लास ठंडा दूध पी लें.
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C.केला का सेवन....................
यह फल एक नेचुरल एंटासिड है, जिससे पेट में जलन जैसी समस्या में तुरंत राहत मिलती है. जिन लोगों को गर्मियों में एसिडिटी की बहुत दिक्कत होती है वो नियमित तौर पर केला खाएं.

D.सौंफ का सेवन....................
मुंह को फ्रेश करने के साथ-साथ सौंफ एसिडिटी में भी राहत देती है. आप इसे ऐसे ही चबाएं या फिर इसकी चाय बनाकर पिएं, यह दोनों तरीकों से आपको आराम देती है. वहीं, सबसे बेहतर तरीका है कि आप खाना खाने के बाद हर बार सौंफ खाएं, आपको एसिडिटी नहीं होगी.

E.आंवले का सेवन.....................
विटामिन-सी से भरपूर आंवला पेट के दर्द, गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी में राहत देता है. आप इसके रोजाना सेवन करें. पेट में आराम के साथ-साथ इससे खूबसूरत बाल और स्किन में भी फायदा मिलेगा.

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थाइराइड (Thyroid) का अचूक आयुर्वेदिक उपचार


आज के समय में ज़्यादातर लोगों को थाइराइड की समस्या है, इसके कारण सैकड़ों बीमारियां घेर लेती है। मोटापा इसी के कारण बढ़ जाता है।
लोग दवा खाते रहते हैं लेकिन ये ठीक नही होता।

इसलिए दवा के साथ कुछ नियम जान लें 10 दिन में थाइराइड से आराम मिल जायेगा।

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A. घर से रिफाइंड तेल बिलकुल हटा दीजिये, न सोयाबीन न सूरजमुखी, भोजन के लिए सरसों का तेल, तिल का तेल या देशी घी का प्रयोग करें।

B. आयोडीन नमक के नाम से बिकने वाला ज़हर बंद करके सेंधा नमक का प्रयोग करें, समुद्री नमक BP, थाइराइड, त्वचा रोग और हार्ट के रोगों को जन्म देता है।

C. दाल बनाते समय सीधे कुकर में दाल डाल कर सीटी न लगाएं, पहले उसे खुला रखें, जब एक उबाल आ जाये तब दाल से फेना जैसा निकलेगा, उसे किसी चमचे से निकाल कर फेंक दें, फिर सीटी लगा कर दाल पकाएं।
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इन तीन उपायों को अगर अपना लिया तो पहले तो किसी को थाइराइड होगा नही और अगर पहले से है तो दवा खा कर 10 दिन में ठीक हो जायेगा।

थाइराइड की दवा

2 चम्मच गाजर का रस
3 चम्मच खीरे का रस
1 चम्मच पिसी अलसी

तीनो को आपस में मिला कर सुबह खाली पेट खा लें।
इसे खाने के आधे घंटे बाद तक कुछ नही खाना है।

ये इलाज़ रोज सुबह खाली पेट कर लें 7 दिन में परिणाम देख लें।
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घर पर ENO बनाये

सामग्री --- 100 ग्राम ENO बनाने के लिए
1---40 ग्राम नीबू सत्व
2----55 ग्राम  खाने वाला  सोडा
3-----05 ग्राम सेंधा नमक

सभी सामग्री को अच्छे से मिलाकर airtight कांच की बोतल में भरकर रखे।
प्रयोग

एक गिलास पानी में 3-4 ग्राम  डाल कर अच्छे से मिलाए । बिलकुल ENO जैसा बन जायेगा ।
ये साम्रगी किराणे की दुकान पर मिल जायेगी ।
कुल 8 से 10 ₹ में 100 ग्राम ENO तैयार हो जाएगा, जबकि  Eno का पेकेट 5gm 7 rs.मे आता है।
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उच्च रक्तचाप (High BP)

जिन मरीजों को रोज BP की दवा खानी पड़ती है उनके लिए एक अचूक हथियार है।

200 ग्राम बड़ी इलायची ले कर तवे पर भूने, इतना भूनना है कि इलायची जल कर राख हो जाये, इस राख को पीस कर किसी डिब्बी में भर लें, सुबह खाली पेट और शाम को भोजन से 1 घंटा पहले 5 ग्राम राख को 2 चम्मच शहद में मिला कर खा लें|

नियमित 15-20 दिन इस उपचार को करने के बाद आपको BP की किसी दवा को खाने की ज़रूरत नही पड़ेगी।
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फ्रीज़ किए गए नींबू के आश्चर्यजनक परिणाम

सबसे पहले नींबू को धोकर फ्रीज़र में रखिए
८ से १० घंटे बाद वह बर्फ़ जैसा ठंडा तथा कड़ा हो जाएगा|

अब उपयोग मे लाने के लिए उसे कद्दूकस कर लें
इसे आप जो भी खाएँ उस पर डाल कर इसे खा सकते हैं|

इससे खाद्य पदार्थ में एक अलग ही टेस्ट आऐगा
नीबू के रस में विटामिन सी होता है। ये आप जानते हैं,आइये देखें इसके और क्या-क्या फायदे हैं|

A. नीबू के छिलके में ५ से १० गुना अधिक विटामिन सी होता है और वही हम फेंक देते हैं

B. नींबू के छिलके में शरीर कॆ सभी विषेले द्रव्यों को बाहर निकालने की क्षमता होती है

C. नींबू का छिलका कैंसर का नाश करता है , इसका छिलका कैमोथेरेपी से १०,००० गुना ज्यादा प्रभावी है

D. यह बैक्टेरियल इन्फेक्शन, फंगस आदि पर भी प्रभावी है

E. नींबू का रस विशेषत: छिलका,  रक्तदाब तथा मानसिक दबाव को नियंत्रित करता है

F. नींबू का छिलका १२ से ज्यादा प्रकार के कैंसर में पूर्ण प्रभावी है और वो भी बिना किसी साईड इफेक्ट के

G. इसलिये आप अच्छे पके हुए तथा स्वच्छ नींबू फ्रीज़र में रखें और कद्दूकस कर प्रतिदिन अपने आहार के साथ प्रयोग करें
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 चीनी एक जहर है जो अनेक रोगों का कारण है, जानिये कैसे...

A.चीनी बनाने की प्रक्रिया में गंधक का सबसे अधिक प्रयोग होता है । गंधक माने पटाखों का मसाला

B.गंधक अत्यंत कठोर धातु है जो शरीर मेँ चला तो जाता है परंतु बाहर नहीँ निकलता ।

C.चीनी कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाती है जिसके कारण हृदयघात या हार्ट अटैक आता है ।

D.चीनी शरीर के वजन को अनियन्त्रित कर देती है जिसके कारण मोटापा होता है ।

E.चीनी रक्तचाप या ब्लड प्रैशर को बढ़ाती है ।

F.चीनी ब्रेन अटैक का एक प्रमुख कारण है ।

G.चीनी की मिठास को आधुनिक चिकित्सा मेँ सूक्रोज़ कहते हैँ जो इंसान और जानवर दोनो पचा नहीँ पाते ।

H.चीनी बनाने की प्रक्रिया मेँ तेइस हानिकारक रसायनोँ का प्रयोग किया जाता है ।

I.चीनी डाइबिटीज़ का एक प्रमुख कारण है ।

J.चीनी पेट की जलन का एक प्रमुख कारण है ।

K.चीनी शरीर मे ट्राइ ग्लिसराइड को बढ़ाती है ।

L.चीनी पेरेलिसिस अटैक या लकवा होने का एक प्रमुख कारण है।

M.चीनी बनाने की सबसे पहली मिल अंग्रेजो ने 1868 मेँ लगाई थी ।उसके पहले भारतवासी शुद्ध देशी गुड़ खाते थे और कभी बीमार नहीँ पड़ते थे ।

N.मेहरबानी करके जितना हो सके, चीनी से गुड़ पे आएँ ।

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लाइलाज बिमारीयो मे कारगर है पुनॅनवां जड़


आज हम बात कर रहे है पुनॅनवां की, ज्यादातर सफेद ( श्वेत ) पुनॅनवां आैषधीय गुणो का भंडार है | यह हजारो सालो से उपयोग मे आ रही है | बहोत बडे ऐवं नामांकित वैध्य इसका ज्यादा प्रमाण मे प्रयोग सालो से करते आ रहे है, आइये विस्तारसे जानते है पुनॅनवां के बारे में|

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अगर आप पुनॅनवां का इस्तेमाल करके शारिरिक रोग दूर करनां चाहते है तो कीसी भी रोग मे इसको कमसे कम २-३ महिनों तक इसका इस्तेमाल जरुर करे |

A. लिवर की खराबी
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लिवर को सुधारतां है पुनॅनवां मंडुर नामक टेब्लेट सुबह शाम २-२ की माञामे लेने से पाचनसबंधी समस्यां ऐवं लिवर मे सुधार होता है | लिवर की कायॅ प्रणाली ऐवं लिवर फंक्शन मे यह काफी कारगर आैषधि है |
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B. मूञ रोग मे उपयोगी
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मुञ सबंधी रोग जैसे की पेशाबमे जलन, बार बार पेशाब जानां, पेशाब मे जलन, पेशाब काफी कम आनां वगेरह समस्यां मे १-१ चम्मच पुनॅनवां जड का चूरन गुनगुने पानी से सुबह शाम लेने से फायदां होतां है |

C. गढिया के ददॅ को दूर करतां है
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अगर आप गढिया रोग से पिडीत है तो सुबह शाम १-१ चम्मच पुनॅनवां चूरन लेने से गढिया रोग का ददॅ दूर होतां है |

D. किडनी को स्वस्थ रखतां है
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सुबह १ चम्मच पुनॅनवां जड का चूरन लेने से किडनी सबंधी समस्या कभी नही होती |

E. हाथ-पैरो की सुजन दूर करतां है
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अगर हाथ-पैरो मे सुजन आ गइ हो आैर शरिर काफी तेज ददॅ कर रहां हो तो सुबह शाम १-१ चम्मच पुनॅनवां का चूरन कुछ महिनो तक लेने से सुजन दूर होती है |

F. थाइराइड मे है उपयोगी
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पुनॅनवां 5 gms + 4 gms कांचनार छाल मिक्स करके चूरन बनाकर २ ग्लास पानी मे उबाले जब आधा पानी बचे तब छानकर खालीपेट पिने से थाइराइड कन्ट्रोल रहतां है |

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आगर आप किसी अन्य बिमारी का समाधान चाहते है तो हमें कमेंट बॉक्स बिमारी के बारे में और अपना वाट्सएप्प नम्बर के साथ लिखें, आप की पूरी सहायता की जाएगी|

Tuesday, March 13, 2018

काले नमक का पानी पीने के फायदे


आप सभी ने काले नमक के बारे मे जरूर सुना होगा और बहुत सारे लोग इसका प्रयोग भी करते होगे, पर शायद ये बात बहुत कम लोग जानते है की काला नमक कई प्रकार की बिमारीयों को भी ठीक करता है| आज हम आप को बताने जा रहे है काले नमक का प्रयोग और उससे सही होने वली बिमारीयों के बारे में|

रोज सुबह काला नमक (black salt) और पानी मिला कर पीना शुरु करें, इस घोल को सोल वॉटर (salt water) कहते हैं, जिससे आपकी ब्‍लड शुगर, ब्‍लड प्रेशर, ऊर्जा में सुधार, मोटापा और अन्‍य तरह की बीमारियां ठीक होंगी।  काले नमक में 80 खनिज और जीवन के लिए वे सभी आवश्यक प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो जरुरी हैं।

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how to make salt water - नमक वाला पानी बनाने की विधि - एक गिलास हल्‍के गरम पानी (warm water) में एक तिहाई छोटा चम्‍मच काला नमक मिलाइये। देखिये कि क्‍या काले नमक का टुकड़ा (क्रिस्‍टल) पानी में घुल चुका है। उसके बाद इसमें थोड़ा सा काला नमक और मिलाइये। जब आपको लगे कि पानी में नमक अब नहीं घुल रहा है तो, समझिये कि आपका घोल पीने के लिये तैयार हो गया है।

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benefit of salt water
पाचन दुरुस्‍त करे (Good digestion)

नमक वाला पानी  पेट के अंदर प्राकृतिक नमक, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और प्रोटीन को पचाने वाले इंजाइम को उत्‍तेजित करने में मदद करता है। इससे खाया गया भोजन टूट कर आराम से पच जाता है। इसके अलावा इंटेस्‍टाइनिल ट्रैक्ट और लिवर में भी एंजाइम को उत्‍तेजित होने में मदद मिलती है, जिससे खाना पचने में आसानी होती है।

नींद लाने में लाभदायक

अपरिष्कृत नमक में मौजूदा खनिज हमारी तंत्रिका तंत्र को शांत करता है। नमक, कोर्टिसोल और एड्रनलाईन, जैसे दो खतरनाक सट्रेस हार्मोन को कम करता है। इसलिये इससे रात को अच्‍छी नींद लाने में मदद मिलती है।

शरीर करे डिटॉक्‍स detox

नमक में काफी खनिज होने की वजह से यह एंटीबैक्‍टीरियल का काम भी करता है। इस‍की वजह से शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्‍टीरिया का नाश होता है।

त्वचा की समस्‍या healthy skin

नमक में मौजूद क्रोमियम एक्‍ने से लड़ता है और सल्‍फर से त्‍वचा साफ और कोमल बनती है। इसके अलावा नमक वाला पानी पीने से एक्‍जिमा और रैश की समस्‍या दूर होती है।

मोटापा घटाए fat reduction

यह पाचन को दुरुस्‍त कर के शरीर की कोशिकाओं तक पोषण पहुंचाता है, जिससे मोटापा कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

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चेहरे की सुंदरता के लिए अद्भुत आयुर्वेदिक उपाय

आयुर्वेद के माध्यम से आप अपने चेहरे को सुन्दर और आकर्षक बना सकते है वो भी बिना किसी साईडिफेक्ट के|
1. संतरे के सूखे हुए छिलके का दो चम्मच पाउडर लेकर उसमें थोड़ा सा दूध और हल्दी मिलाएँ । इस उबटन को चेहरे पर लगाकर 10मिनट छोड़ दें। उसके बाद गुनगुने पानी से चेहरे को लें। दाग और झाईयाँ है तो यह उबटन बहुत लाभकारी है ।

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2. नींबू के रस को चेहरे पर लगाकर 10मिनट बाद गुनगुने पानी से धोलें ।इससे त्वचा साफ, सुंदर और मुलायम दिखेगी।
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3. गाजर का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाकर 10मिनट छोड़ दें फिर गुनगुने पानी से धो लें, इससे चेहरे पर अद्भुत निखार आएगा ।

4. थनिये की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बनाकर इसमें 4-5 बूँद नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाएँ। कुछ देर बाद सादा पानी से धोलें। इससे चेहरे के मुहाँसे, दाग,धब्बे तथा झांइयां मिट जायेगी।

5. आलू का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगायें, 10मिनट बाद सादा पानी से धो लें। इससे चेहरे के दाग धब्बे मिट जायेंगे ।
             
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क्या आप की किडनी फेल हो चुकी है, जरूर पढ़ें ये आयुर्वेदिक उपचार


किडनी खराब होने की समस्या को बहुत ही घातक रोगों में से एक माना जाता है भारत में लाखो लोग किडनी रोग से पिडीत है| सभी लोगो मे यह धारणां हो चूकी है की किडनी रोग मतलब व्यकित का जीवन भी खत्म लेकिन इस मान्यतां को बदलने वं आयुर्वेद किडनी रोग पर कितनां प्रभावी होतां है यह समजाने के लिये हम आज का हमारा किडनी रोग विषयक लेख को अधिक से अधिक शेयर करीये क्योकी यह मेसेज किडनी के मरीजो के लिये जिवनदातां साबीत हो सकतां है|

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 क्रोनिक किडनी फैल्योर यानी गुर्दे की विफलतां क्यां होती है
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जब गुर्दे की कार्यक्षमतां धीमी होने लगती है आैर स्थिती बिगडने लगती है ,तब हमारे शरीरमे बनने वाले तरल पदार्थो की वं अपशिष्ट पदार्थो की माञा जरुरत से कइ गुनां बढ़ जाती है ऐलोपैथी सायन्स मे सीर्फ यही तरल पदार्थो को सीन्थेटीक तरीके से दूर कीयां जातां है जबकी आयुर्वेद नां सीर्फ शरीर से हानीरुप चीजो को हटाता बल्की किडनी का कार्य सुधार सके ऐसी बहोत सी जडीबुट्टीयां हमारे पांच साल पुराने शास्ञोक्त ग्रंथो मे बताइ जा चूकी है|

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क्रोनिक किडनी फैल्योर लोगो की सोच से हजारो गुनां खतरनाक भी हो सकतां है क्योकी अधिकांश लोगो की सोच रहती है की किडनी फैल्योर है तो हम इसको डायालीसीस के माध्यम से बढ़ा हुवा क्रियेटीनीन कम करते जायेंगे जब की डायालीसीस से किडनी का कार्य सुधर कभी  नही सुधर सकतां आैर धीरे धीरे करीबन २ साल के भीतर लोग मौत की चपेट मे आ जाते है|

क्रोनिक किडनी फेल्योर के लक्षण
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⭕ मुंह कडवां रहनां
⭕ खून की कमी होनां
⭕ पेशाब आने मे दिक्कत
⭕ हाथ-पैरो मे सुजन आनां
⭕ पेशाब मे प्रोटीन आनां
⭕ क्रियेटीनीन का बढ़नां
⭕ पेशाब रुक-रुक कर आनां
⭕ बार बार पथरी होनां
⭕ पोटेशियम बढ़नां
⭕ ब्लड युरीयांका बढ़नां

उपर बताये गये लक्षण जब भी दिखाइ दे तो तुरंत ही अपने नजदिकी चिकित्सक से जांच करवाये | हो सके तो युरीन, किडनी, ब्लड वगेरह की जांचे करवाये |

क्यां आपकी या आपके किसी सम्बंधी की किडनी फेल हो चूकी है या आपकी पहचान मे कोई है जिसकी किडनी फेल हो चूकी है
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गोखरु               150 ग्राम
पुनर्नवां              100 ग्राम
वरुण छाल         100 ग्राम
नीम की छाल       50 ग्राम
सौंठ                   20 ग्राम
ऐरण्डी जड़         50 ग्राम
सुर्यक्षार               20 ग्राम
जौ-क्षार.             20 ग्राम

उपर दी गइ चीजे केवल क्वालीटी की ही लिजिये | अगर उपर बताइ गइ चिजे हलकी गुणवत्ता वाली होगी तब आपको रीजल्ट नही मिलेगा | उच्च गुणवत्तायुक्त की सभी आैषधी को कुटकर कपडछान चूरन बनाकर मिक्स करले आैर कांच के डीब्बे मे भर दे आैर सुबह वं शाम  २ चम्मच चूरन + २ ग्लास पानी मिलाकर तब तक धीमी आंच पर पकाये जब तक आधा ग्लास पानी ही बचे तब ठंडा होने पर छानकर खालीपेट  पीये❗

उपर दी गइ आैषधी के साथ इन चिजो का भी सेवम करीये

पुनर्नवां मंडुर तीनो समय २-२ गोली खाने के बाद सेवन करें

ऐमिल कंपनी की नीरी के.ऐफ.टी. सीरप २-२ चम्मच सुबह शाम खाली पेट सेवन करे |

जंडु कंपनी का गोखरु काढ़ा ३-३ चम्मच + ३-३ चम्मच पानी मिलाकर सुबह शाम खाली पेट सेवन करीये |

इसके साथ रक्तवर्धक कोइ अच्छी दवां का सेवन जरुर करें |

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Saturday, March 10, 2018

दाँत दर्द के घरेलू उपचार

दाँत दर्द में हमें बड़ी कठनाई का सामना करना पड़ता है । कई बार कुछ गलत खाने से तो कई बार दांतों की ठीक से सफाई न करने या कीड़े लगने के कारण दांतों में दर्द होने लगता है. दांतों में दर्द का कारण कुछ भी हो, लेकिन इसकी पीड़ा हमारे लिए बेहद कष्टकारी बन जाती है। यहाँ पर हम आपको दाँत दर्द में बहुत ही आसान से उपचार बता रहे है। आप निवेदन है कि इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर व्यक्ति दांत दर्द से छुटकारा पा सके|
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1. पिसी हल्दी, नमक व सरसो का तेल मिलाकर पेस्ट सा बना कर उसे डिब्वे में रख ले| सुबह इस पेस्ट को ब्रुश अथवा उगली के द्वारा दाँतों व मसूड़ों पर लगा लें थोड़ी देर लगा कर रखे फिर बाद में कुल्ला कर लें इस प्रयोग से हिलते हुए दाँत जम जाते हैं और दाँतो से पीलापन दुर होकर दाँत विल्कुल सफेद हो जाते हैं। इसे प्रयोग करते रहने से कभी भी पायरिया नही होगा।
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2. नींबू के छिलकों पर थोड़ा-सा सरसों का तेल डालकर दाँत एवं मसूढ़ों पर लगाने से दाँत सफेद एवं चमकदार होते हैं, मसूढ़े मजबूत होते हैं और हर प्रकार के जीवाणुओं तथा पायरिया आदि रोगों से बचाव होता है।
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3. जामफल के पत्तों को अच्छी तरह चबाकर उसका रस मुँह में फैलाकर थोड़ी देर तक रखकर थूक देने से अथवा जामफल की छाल को पानी में उबालकर उसके कुल्ले करने से हर तरह के दाँत के दर्द में लाभ होता है।
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4. हींग दांत में दर्द से तुरंत मुक्ति दिलाता है । हींग को मौसमी के रस में डुबोकर दांतों में दर्द की जगह पर रखें, मौसमी न होने पर हींग में नींबू भी मिलाया जा सकता है। इससे शीघ्र ही आपको दर्द से छुटकारा मिल जायेगा।
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5. तिल के तेल में पीसा हुआ नमक मिलाकर उँगली से दाँतों को रोज घिसने से दाँत की पीड़ा दूर होती है ।
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6. दांतों के दर्द में लौंग दांतों के सभी बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता हैं। ऐसे में लौंग को दांतों के दर्द की जगह पर रखना चाहिए, कुछ ही देर में आपका दर्द जाता रहेगा। लेकिन चूँकि इसमें दर्द कम होने की प्रक्रिया थोड़ी धीमी होती है इसलिए इसमें धैर्य रखना चाहिए ।
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7. जामुन के वृक्ष की छाल के काढ़े के कुल्ले करने से दाँतों के मसूढ़ों की सूजन मिटती है व हिलते दाँत भी मजबूत होते हैं।
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8. प्याज दांत दर्द के लिए एक उत्तम घरेलू उपचार है। जो व्यक्ति रोजाना कच्चा प्याज खाते हैं उन्हें दांत दर्द की शिकायत होने की संभावना कम रहती है क्योंकि प्याज में कुछ ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो बैकटीरिया को नष्ट कर देते हैं। अगर आपके दांत में दर्द है तो प्याज के टुकड़े को दांत के पास रखें अथवा प्याज चबाएं। आपको आराम महसूस होने लगेगा।
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9. 10 ग्राम बायविडंग और 10 ग्राम सफेद फिटकरी थोड़ी कूटकर तीन किलो पानी में उबालें। एक किलो बचा रहने पर छानकर बोतल में भरकर रख लें। तेज दर्द में दिन में 2-3 बार इस पानी से कुल्ला करने से दो दिन में ही आराम आ जाता है। कुछ अधिक दिन कुल्ला करने से दाँत पत्थर की तरह मजबूत हो जाते हैं।
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10. प्रायः दाढ़ में कीड़ा लगने पर असहय दर्द उठता है। तब अमरूद के पत्ते के काढ़े से कुल्ला करने से दाँत और दाढ़ की भयानक टीस और दर्द दूर हो जाता है। पतीले में पानी में अमरूद के पत्ते डालकर इतना उबालें कि वह पानी उबाले हुए दूध की तरह गाढ़ा हो जाए।
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11. नमक के पानी के कुल्ले करने एवं कत्थे अथवा हल्दी का चूर्ण लगाने से गिरे हुए दाँत का रक्तस्राव जल्दी ही बंद हो जाता है।
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12. लहसुन में एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं जो अनेकों प्रकार के संक्रमण से लड़ने की क्षमता रखते हैं।लहसुन में एलीसिन होता है जो दांत के पास के बैकटीरिया, जर्म्स, जीवाणु इत्यादि को नष्ट कर देता है। इसलिए एक फांक लहसुन को सेंधा नमक के साथ पीसकर यदि आप दांतों में दर्द की जगह पर लगायेंगे तो आपको दर्द में आराम मिलेगा।
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13. दाँत-दाढ़ दर्द में अदरक का टुकड़ा कुचलकर दर्द वाले दाँत में रखकर मुँह बंद कर लें और धीरे-धीरे रस चूसते रहें। फौरन राहत महसूस होगी।
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14. नीम के पत्तों की राख में कोयले का चूरा तथा कपूर मिलाकर रोज रात को सोने से पहले लगाकर पायरिया में लाभ होता है।
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15. सरसों के तेल में सेंधा नमक मिलाकर दाँतों पर लगाने से दाँतों से निकलती दुर्गन्ध एवं रक्त बंद होकर दाँत मजबूत होते हैं तथा पायरिया भी जड़ से ख़त्म हो जाता है।
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16. फिटकरी को तवे या लोहे की कड़ाही में पानी के साथ आग पर रखें। जब पानी जल जाए और फिटकरी फूल जाए तो तवे को आग पर से उतारकर फिटकरी को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। जितना फिटकरी का पावडर बने उसका 1/4 भाग पिसी हल्दी उसमें मिला कर लकड़ी की सींख की नोक से दाँत के दर्द वाले स्थान पर या सुराख के भीतर यह मिश्रण भर दें। यह बहुत ही लाभकारी प्रयोग है ।
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17. भोजन अथवा अन्य किसी भी पदार्थ को खाने के बाद अच्छी तरह से कुल्ला जरूर करें तथा गर्म वस्तु के तुरंत पश्चात् ठण्डी वस्तु का सेवन न करें।
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